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National Consumer Day 2018 Themed with Timely Disposal of Consumer Complaints- राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस : 24 दिसंबर


The National Consumer Day was observed across India on December 24, 2018 with the theme “Timely Disposal of Consumer Complaints”.On this day, the Consumer Protection Act, 1986 had received the assent of the president. The enactment of the Act is considered as a historic milestone in the consumer movement in the country.The day provides an opportunity to highlight the importance of the consumer movement and the need to make every consumer more aware of their rights and responsibilities.
National Consumer Day 2018 Themed with Timely Disposal of Consumer Complaints

About National Consumer Day

• The day is celebrated annually on 24 December to mark the enactment of the Consumer Protection Act, 1986, that was enacted on December 24, 1986.
• Observance of this day provides an opportunity for individuals to highlight the importance of the consumer movement and promote the basic rights and responsibilities of all consumers.
• The day also reminds the producers and distributors of goods and services about their responsibility towards the protection of consumer rights.
Consumer Protection Act, 1986
• The Consumer Protection Act was enacted with the objective of providing better protection of consumer’s interest.
• The act provides effective safeguards to the consumer, against various types of exploitation and unfair dealings, relying mainly on compensatory rather than a disciplinary or preventive approach. 
• The act applies to all goods and services unless specifically exempted, which covers the private, public and cooperative sectors. It also provides speedy and inexpensive adjudication
• The Act envisages the promotion and protection of rights of consumers such as Right to Safety, Right to be informed, Right to Choose and Right to be heard.
• Recently, on December 20, 2018 Lok Sabha passed the Consumer Protection Bill 2018 to amend the Act. The bill calls for strict punishment, including jail terms and hefty fines for misleading advertisements and food adulteration.
In India 24 December is celebrated as National Consumer Day . In the year 1986 , the Consumer Protection Act Bill was passed on this day . After this amendment was made in this Act in 1991 and 1993. In order to make the Consumer Protection Act more efficient and purposeful , a comprehensive amendment was brought in December 2002 and implemented from March 15, 2003 . Consequently, Consumer Protection Rules, 1987 were amended and notified on March 5, 2004 . Government of India has declared a National Consumers Day on December 24, because the President of India accepted the Act on that day's Historical Consumer Protection Act, 1986. Apart from this, every year on 15th March, every year the World Consumer Rights Day is celebrated. This day has been written in the golden letters in the history of Indian Customer Movement. This day was first celebrated in India in 2000 . And even further each year is celebrated.
भारत में प्रत्येक वर्ष 24 दिसंबर को एक विशिष्ट विषय के साथ राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय ग्राहक आंदोलन के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। वर्ष 2018 के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस की थीम ‘उपभोक्ता शिकायतों का समय पर निपटान (Timely Disposal of Consumer Complaints)’ है।
24 दिसंबर, 1986 को भारत सरकार द्वारा उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिये एक बड़ा कदम उठाते हुए उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 पारित किया गया। तभी से 24 दिसंबर का दिन राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह अधिनियम जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत में समान रूप से लागू है।


उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार कोई व्यक्ति जो अपने उपयोग के लिये सामान अथवा सेवायें खरीदता है वह उपभोक्ता है। क्रेता की अनुमति से ऐसे सामान/सेवाओं का प्रयोग करने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता है। अत: हम मंै से प्रत्येक किसी न किसी रूप में उपभोक्ता ही है। हाल ही में इसका स्थान लेने के लिये लोकसभा में उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018 पेश किया गया है।
उपभोक्ता अधिकार सरंक्षण के कुछ कानून:
उपभोक्ता के साथ ही स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन, केंद्र या राज्य सरकार, एक या एक से अधिक उपभोक्ता कार्यवाही कर सकते हैं।
  1. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम-1885,
  2. पोस्ट आफिस अधिनियम 1898,
  3. उपभोक्ता/सिविल न्यायालय से संबंधित भारतीय वस्तु विक्रय अधिनियम 1930,
  4. कृषि एवं विपणन निदेशालय भारत सरकार से संबंधित कृषि उत्पाद
  5. ड्रग्स नियंत्रण प्रशासन एमआरटीपी आयोग-उपभोक्ता सिविल कोर्ट से संबंधित ड्रग एण्ड कास्मोटिक अधिनियम-1940,
  6. मोनापालीज एण्ड रेस्ट्रेक्टिव ट्रेड प्रेक्टिसेज अधिनियम-1969,
  7. प्राइज चिट एण्ड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) अधिनियम-1970
  8. उपभोक्ता/सिविल न्यायालय से संबंधित भारतीय मानक संस्थान (प्रमाण पत्र) अधिनियम-1952,
  9. खाद्य पदार्थ मिलावट रोधी अधिनियम-1954,
  10. जीवन बीमा अधिनियम-1956,
  11. ट्रेड एण्ड मर्केन्डाइज माक्र्स अधिनियम-1958,
  12. हायर परचेज अधिनियम-1972,
  13. चिट फण्ड अधिनियम-1982,
  14. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,
  15. रेलवे अधिनियम’-1982
  16. इंफार्मेषन एंड टेक्नोलोजी अधिनियम-2000,
  17. विद्युत तार केबल्स-उपकरण एवं एसेसरीज (गुणवत्ता नियंत्रण) अधिनियम-1993,
  18. भारतीय विद्युत अधिनियम-2003,
  19. ड्रग निरीक्षक-उपभोक्ता-सिविल अदालत से संबंधित द ड्रग एण्ड मैजिक रेमिडीज अधिनियम-1954,
  20. खाद्य एवं आपूर्ति से संबंधित आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955,
  21. द स्टेंडर्डस ऑफ वेट एण्ड मेजर्स (पैकेज्ड कमोडिटी रूल्स)-1977,
  22. द स्टैंडर्ड ऑफ वेट एण्ड मेजर्स (इंफोर्समेंट अधिनियम-1985,
  23. द प्रिवेंशन आफ ब्लैक मार्केटिंग एण्ड मेंटीनेंस आफॅ सप्लाइज इसेंशियल कमोडिटीज एक्ट-1980,
  24. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/केंद्र सरकार से संबंधित जल (संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम-1976,
  25. वायु (संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम-1981,
  26. भारतीय मानक ब्यूरो-सिविल/उपभोक्ता न्यायालय से संबंधित घरेलू विद्युत उपकरण (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश-1981,
  27. भारतीय मानक ब्यूरो से संबंधित भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम-1986,
  28. उपभोक्ता न्यायालय से संबंधित उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,
  29. पर्यावरण मंत्रायल-राज्य व केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से संबंधित पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986
  30. भारतीय मानक ब्यूरो-सिविल-उपभोक्ता न्यायालय से संबंधित विद्युत उपकरण (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश
SOURCES:
1. Madguy
2. Wikipedia
3. Jagranjosh

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